नई दिल्ली, जुलाई 12 -- दिल्ली की एक अदालत ने शाहीन बाग स्थित कब्रिस्तान में पुरानी कब्रों के दोबारा इस्तेमाल (ग्रेव री-यूज) की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक कब्रिस्तान की सीमित जमीन पर किसी एक व्यक्ति के लिए विशेष अधिकार नहीं बनाया जा सकता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कब्रों का दोबारा उपयोग केवल जगह की कमी जैसी परिस्थितियों में स्वीकार्य हो सकता है। जिला न्यायाधीश अतुल अहलावत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एम. बशारत हुसैन की अंतरिम राहत संबंधी याचिका खारिज कर दी गई थी। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि यह फैसला केवल अंतरिम राहत के सवाल तक सीमित है और मूल वाद की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अपने पक्ष में साक्ष्य पेश कर सकते हैं। यह भी पढ़ें- भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा तो मुसलमान कहां जाएंग...