चम्पावत, मार्च 7 -- लोहाघाट में पहाड़ की महिलाएं अपनी मेहनत और हिम्मत से कठिन परिस्थितियों में भी नई राह बना लेती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी रीठा साहिब की रहने वाली दिया गुरुरानी की है। जिनकी करीब 20 साल की मेहनत आज रंग ला रही है। दिया ने चम्पावत, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों की कई महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान दिलाई। रीठा साहिब निवासी दिया गुरुरानी ने पढ़ाई के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया। वर्ष 2014 में बीएड किया। इसी दौरान एक एनजीओ से जुड़कर काम शुरू किया। इसके जरिए उन्होंने चम्पावत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ, गढ़वाल की कई महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा। बाद में दिया ने खुद का पहाड़ी उत्पादों का कारोबार शुरू किया। घर का बना अचार, पहाड़ी चावल, मंडुवे का आटा, अनेक प्रकार की बड़ी, पिसा नमक आदि की बिक...
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