किशनगंज, अप्रैल 17 -- दिघलबैंक। सीमावर्ती दिघलबैंक प्रखंड में खेती की रीढ़ माने जाने वाले धान और मक्का की उपज तो भरपूर हो रही है, लेकिन बिक्री की समुचित व्यवस्था नहीं होने से किसान आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर न तो मक्का की कोई संगठित मंडी है और न ही धान खरीद की प्रक्रिया पूरी तरह संतोषजनक, जिसके कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है। प्रखंड में मक्का की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन इसके लिए कोई सरकारी खरीद केंद्र या स्थायी मंडी नहीं है। ऐसे में किसान अपनी उपज लेकर पश्चिम बंगाल के दालकोला या ठाकुरगंज प्रखंड के गलगलिया बाजार का रुख करते हैं। यह भी पढ़ें- दिघलबैंक में कोई भी सरकारी क्रय केंद्र नहीं कई किसान बताते हैं कि परिवहन खर्च और समय की बर्बादी के बावजूद उन्हें वहां जाना पड़ता है, क्योंकि स्थान...