दारुल उलूम परिसर से हटेगी 86 वर्ष पुरानी अफगानिस्तान के बादशाह की निशानी
सहारनपुर, अगस्त 21 -- देवबंद। दारुल उलूम के ऐतिहासिक गेट में शुमार अफगानिस्तान के पूर्व शासक के नाम से बना बाब-ए-जाहिर द्वार को संस्था ने उसकी जर्जर हालत के चलते मिस्मार (गिराने) निर्णय लिया है। हालांकि अपनी जिंदगी में अफगानिस्तान के पूर्व शासक ने उनके द्वारा बनवाए गए गेट वर्ष 2006 में हटवाने से इंकार कर संस्था को इससे अवगत करा दिया था। दारुल उलूम के चार प्रमुख द्वार में से एक प्रमुख द्वार बाब-ए-जहीर शाह को हटाने का निर्णय ले लिया गया है। जिसके लिए संस्था के नायब मोहतमिम मौलाना खालिक मद्रासी ने बाकायदा नोटिस भी जारी किया है। 1359 हिजरी (1940) में अफगानिस्तान के बादशाह रहे जहीर शाह ने अपने स्वंय के खर्चे से दारुल उलूम के छात्रावास परिसर में गेट बनवाया था। गेट में दोनों तरफ बच्चों के हिफ्ज (कुरआन के कंठस्थ याद करने) की कक्षाओं का निर्माण कर...
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