औरंगाबाद, अप्रैल 10 -- दाउदनगर नगर परिषद स्थित गुरुद्वारा बाबा बिहारी दास संगत एक बार फिर चर्चा में है, जहां संरक्षित लगभग तीन सौ वर्ष पुरानी हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब का दाउदनगर एसडीओ अमित राजन, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पप्पू राज के द्वारा निरीक्षण किया गया। यह गुरुद्वारा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। बताया जाता है कि नानकशाही परंपरा से जुड़ा यह स्थल लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। खास बात यह है कि क्षेत्र में सिख समुदाय की संख्या कम होने के बावजूद सनातन धर्मावलंबियों ने इस पवित्र ग्रंथ और स्थल को वर्षों से सहेज कर रखा है। इसी कारण यह स्थान आज भी सिख श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है और दूर-दराज से लोग यहां पहुंचकर मत्था टेकते हैं।...