दही को जूठा छोड़ने से क्यों किया जाता है मना? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
नई दिल्ली, सितम्बर 11 -- भारतीय परंपरा में दही को केवल भोजन का हिस्सा नहीं, बल्कि इसे शुभता और समृद्धि से भी जोड़कर देखा गया है। पूजा-पाठ से लेकर मांगलिक कार्यों तक दही का इस्तेमाल कई अवसरों पर किया जाता है। भगवान को भोग लगाने और पंचामृत तैयार करने में भी इसका विशेष स्थान है। यही वजह है कि दही से जुड़ी कई मान्यताएं भी लोगों के बीच प्रचलित हैं। घर से किसी शुभ काम के लिए निकलते समय दही-चीनी खिलाने की परंपरा इसका एक उदाहरण है। वहीं, दही को गिराना या थाली में जूठा छोड़ना लोक मान्यताओं में शुभ नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं दही से जुड़ी इन धारणाओं और इसके पीछे की धार्मिक मान्यता के बारे में।धार्मिक परंपरा में दही को क्यों शुभ? दूध से तैयार होने के कारण दही को सात्विक आहार की श्रेणी में रखा गया है। धार्मिक अनुष्ठानों में पंचामृत तैयार करने के...
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