अमरोहा, अगस्त 30 -- दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन मूलनायक चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक एवं पूजा अर्चना की गई। स्थानीय जैन समाज के अध्यक्ष डा.अनिल जैन ने बताया कि उत्तम मार्दव धर्म का तात्पर्य परिणाम की निर्मलता एवं कोमलता से है। मनुष्य अहंकार के वशीभूत होकर अपने मान अभिमान की खातिर अनेक अच्छे बुरे कार्य करता है। यही सब कार्य कसाय को बढ़ावा देते हैं। जब तक मनुष्य के मन में अहंकार रूपी कसाय रहेगी, तब तक उत्तम मार्दव धर्म प्राप्त नहीं होगा। सभी सांसारिक मनुष्यों को मन के विचारों को स्थिर कर अहंकार का त्याग करना चाहिए। दस धर्म में से एक धर्म उत्तम मार्दव भी है। अहंकार का त्याग करना ही श्रेयकर है। रात्रि में सामूहिक आरती की गई। इस दौरान जिनेंद्र जैन, राजेंद्र जैन, प्रेम कुमार जैन, इंदर जैन, कौशल जैन, विशाल जैन, प्राची जैन, सुमन जैन, पायल जैन, सरल...
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