लखनऊ, जुलाई 13 -- -इलाज को एआई से जोड़ने की सलाह दी यह भी पढ़ें- 'पहले इलाज, पर्चा बाद में': डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले-मरीज के शुरुआती 2-5 मिनट सबसे कीमती लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। यह भी पढ़ें- 'इलाज में एआई अपनाएं, पर हीलिंग टच न भूलें'; राजनाथ सिंह बोले- मशीन नहीं समझ सकती मरीज के मन की पीड़ा दवा से जख्म भरते हैं। अपनापन दिल को सुकून देता है। लिहाजा डॉक्टर संवेदनशील बनें। डॉक्टर की पहचान केवल उसके ज्ञान से नहीं, बल्कि व्यवहार और मानवीय दृष्टिकोण से होती है। मरीज डॉक्टर के ज्ञान पर भरोसा करता है। उसके स्नेह, आत्मीयता और अपनापन को जीवनभर याद रखता है। लिहाजा दवा के साथ व्यवहार में भी हीलिंग टच होना चाहिए। कई मरीज डॉक्टरों को सफेद कोट में देखकर घबरा जाते हैं। जिसे व्हाइट कोट सिंड्रोम कहा जाता है। इस सोच को बदलने की जरूरत है। यह बातें रक्षा...