उन्नाव, मार्च 23 -- उन्नाव। टीबी लाइलाज नहीं है, लेकिन आधा-अधूरा इलाज जानलेवा जरूर हो सकता है। जिला अस्पताल के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि क्षय रोग की दवा का कोर्स बीच में छोड़ना सीधे तौर पर मौत को न्योता देने के समान है। अक्सर देखा गया है कि मरीज 15-20 दिन दवा खाने के बाद जब राहत महसूस करने लगते हैं, तो बिना डॉक्टरी सलाह के इलाज बंद कर देते हैं। यही वह मोड़ है जहां साधारण टीबी मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट का रूप ले लेती है। एमडीआर की स्थिति में टीबी का बैक्टीरिया इतना जिद्दी और शक्तिशाली हो जाता है कि सामान्य दवाएं उस पर बेअसर साबित होती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जहां साधारण टीबी 6 से 9 माह में ठीक हो सकती है, वहीं एमडीआर का उपचार न केवल लंबा और जटिल होता है, बल्कि इसमें मरीज के बचने की संभावना भी कम हो जाती है। जनपद में स्वास्थ्य विभाग अब...
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