उन्नाव, अप्रैल 3 -- उन्नाव। चमचमाती इमारतें, सफेद पुते गलियारे और गेट पर तैनात पहरेदार...बाहर से देखने पर जिले के सरकारी अस्पताल किसी कॉरपोरेट स्पताल से कम नहीं लगते, लेकिन इन दीवारों के भीतर की हकीकत बेहद डरावनी है। 189 स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 132 डॉक्टरों के भरोसे 40 लाख की आबादी को छोड़ दिया गया है। हृदय रोगी के लिए कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है तो गर्भवती महिलाओं के लिए पर्याप्त नर्सें नहीं। नतीजा यह है कि मामूली से लेकर गंभीर बीमारी तक, जिला अस्पताल अब केवल एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। यहां आने वाले हर दूसरे मरीज को लखनऊ या कानपुर के लिए टरका दिया जाता है, जिससे गरीब जनता की जेब और जान दोनों पर आफत बनी हुई है। पेश है आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' की पड़ताल...जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.