दरभंगा, मई 5 -- राजीव रंजन झा,दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के तत्वावधान में सोमवार को दोहरी चुनौती और दोहरा संघर्ष : दलित स्त्रीवादी साहित्य के विविध आयाम विषयक एकल व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान देते हुए दलित लेखिका-कवयित्री एवं आलोचक अनीता भारती ने कहा कि ्त्रिरयों के बीच भी जातीय स्तरीकरण मौजूद है। यह समझने की आवश्यकता है कि दलित स्त्रीवादी साहित्य केवल दलित स्त्री लेखन या दलित लेखन भर नहीं है। दलित स्त्रीवाद उसके केंद्र में है। इसकी जड़ें आधुनिक स्त्री आंदोलन से भी बहुत पीछे बौद्ध काल तक जाती हैं। यह भी पढ़ें- जनजातीय सांस्कृतिक आयामों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी बौद्ध काल में दलित स्त्रियों का योगदान बौद्ध काल में सर्वप्रथम गौतम बुद्ध ने जातीय निर्योग्यताओं को ठुकराते हुए संघ में सभी वर्गों की...
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