दलितों पर अत्याचार तो हर सरकार में होते रहे हैं, फिर कठघरे में सपा ही क्यों?
लाल जी प्रसाद निर्मल, जून 1 -- लाल जी प्रसाद निर्मल, सदस्य, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश सत्ता केवल शासन करने का अधिकार नहीं होती, वह एक सामाजिक संदेश भी है। जब कोई दल सत्ता में आता है, तो वह केवल सरकार नहीं बनाता, वह यह अधिकार भी हासिल कर लेता है कि किसकी पीड़ा सुनी जाए और किसकी नहीं, अपराध के लिए किसे दंडित किया जाए और किसे क्षमा। आदर्श तो यह है कि हर पीड़ित की सुनी जाए और हर अपराधी को सजा मिले, लेकिन उत्तर प्रदेश के संदर्भ में लंबे समय तक यह आदर्श स्थिति गायब रही। बात उस पार्टी के शासनकाल की हो रही है, जिसने सत्ता का चरित्र जाति के धागे से बुना। संविधान ने भले ही सबको बराबर घोषित किया हो, लेकिन जब सत्ता जाति की छाया में काम करने लगती है तो संवैधानिक समानता एक लिखित वाक्य से अधिक नहीं रह जाती। उत्तर प्रदेश इस विरोधाभास की सबसे बड़ी प्रयोगश...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.