नई दिल्ली, जून 12 -- ये बात 1940 के दशक की है। उन दिनों भारत में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को आज की तरह इज्जत की नजरों से नहीं देखा जाता था। लोग सिनेमा की दुनिया में काम करने वालों को और इस पेशे को बहुत छोटा समझते थे। इसी दौर के एक मशहूर संगीतकार थे नौशाद साहब। जब उनके निकाह की बात चली, तो उनके माता-पिता के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई। क्या? आइए बताते हैं।क्या हुआ? दरअसल, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वो लड़की वालों को कैसे बताएं कि लड़का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा है। ऐसे में उन्होंने झूठ कहने का फैसला लिया। उन्होंने समाज के डर से लड़की वालों से कहा कि उनका बेटा एक दर्जी है।फिर सच सामने आया या नहीं? लेकिन किस्मत का खेल तो देखिए। जब शादी का दिन आया और बारात लड़की वालों के घर पहुंची, तो वहां जो शहनाई और गाने बज रहे थे, वे 1944 की सुपरहिट फ...