सीवान, अगस्त 15 -- दरौली, एक संवाददाता। देश आजादी के जंग में स्वतंत्रता सेनानियों इतिहास दरौली में शूरवीरों के किस्से से भारी पड़ा है। न शहादतों से पीछे हटे और ना जोश कम हुआ। उस दौर की निशानियां अभी भी जीवंत है जो आजादी की लड़ाई की गवाह है। जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर सरयू नदी के किनारे का भी गांव दरौली भी 1942 में हुए आंदोलन की यादें समेटे हुए है। जिसमें दरौली थाने की पुरानी इमारत आजादी की गवाह है। इसके गौरवशाली गाथा सुनकर अभिमान की अनुभूति होती है। यह भी पढ़ें- अंग्रेजी गोलियों के बीच शहीद हुए थे चंद्रमा प्रसाद समेत कई क्रांतिकारीस्वतंत्रता सेनानियों की गाथा यहां के क्रांतिवीरों ने अंग्रेजों से जमकर मुकाबला किया। इनमें ऐसे हैं जिनकी बहादुरी के चर्चे आज ही होते हैं। हालांकि कई स्वतंत्रता सेनानियों का नाम गुमनाम हो गया। आजादी के दीवा...