लखनऊ, नवम्बर 23 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। बिजली दरों में इजाफे का प्रस्ताव आयोग से रद्द किए जाने के बाद अब विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने निजीकरण का भी प्रस्ताव रद्द किए जाने की मांग की है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि जिस आंकड़े को दरों में इजाफे के लिए आयोग ने उचित नहीं पाया है, उसी आंकड़े के आधार पर निजीकरण का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। ऐसे में उस प्रस्ताव पर मंजूरी देने का कोई औचित्य नहीं बनता है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध का एक साल पूरा होने पर 27 नवंबर को पूरे देश के बिजली कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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