आलोक मिश्र, सितम्बर 4 -- यूपी की सियासत में 'भाई-भतीजावाद' को लेकर होने वाले हमले हमेशा दलों के चुनावी किलों को दरकाने में अहम रहे हैं। बसपा में अंतरकलह से उपजे वर्चस्व के खतरे में भी कहीं न कहीं 'दीवार' को दरकने से बचाने की बेचैनी भी है। मायावती ने गुरुवार को जिस तरह राष्ट्रीय पदाधिकारियों के सामने भतीजे आकाश आनंद का कद घटाया, उसके निहितार्थ में बसपा सुप्रीमो का खुद के प्रभुत्व को कायम रखने का बड़ा संदेश भी है। मायावती ने आनंद को वरिष्ठ पदाधिकारियों की श्रेणी से अपरिपक्व कहकर हटाया तो बैठक में पार्टी के संस्थापक कांशीराम के संकल्प व समर्पण की याद दिलाते हुए खुद के लिए 'बहुजन समाज' का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता सर्वापरि बताया। साथ ही बसपा के किसी प्रकार के भाई-भतीजावाद अथवा परिवारवाद पर भरोसा न करने वाला दल होने की छवि को भी साफ किया है। ...