दंगों के मामलों में तुरंत मिले न्याय
नई दिल्ली, जुलाई 19 -- दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अदालत ने पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच लोगों को दोषी ठहराया है। यह केवल एक व्यक्ति के दोष या निर्दोष होने का मामला नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि यदि ठोस साक्ष्य उपलब्ध हों, तो कानून के सामने किसी का राजनीतिक प्रभाव या सामाजिक हैसियत मायने नहीं रखती। हालांकि, इस फैसले के साथ एक बड़ा प्रश्न भी सामने आता है कि यदि जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त साक्ष्य थे, तो इस मामले को मुकाम तक पहुंचने में लगभग छह वर्ष क्यों लग गए? न्याय में अनावश्यक देरी से पीड़ित परिवारों का विश्वास कमजोर होता है और समाज में यह धारणा बनती है कि प्रभावशाली लोग कानूनी-प्रक्रिया को लंबा खींच सकते हैं। इसीलिए कह...
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