प्रयागराज, मई 9 -- प्रयागराज। जन्म लेने वाली संतान थैलेसीमिया जैसी आनुवांशिक बीमारी से मुक्त रहे इसलिए शादी से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच और काउंसिलिंग जरूरी है। बीमारी को महज एनीमिया मानकर या बीमारी को छुपाकर सात फेरे न लें। यहां तक कि यदि एक दूजे के हो गए हैं तो संतान उत्पत्ति की योजना न बनाएं। क्योंकि ऐसी स्थिति में पैदा होने वाली संतान भी थैलेसीमिया से पीड़ित हो जाएगी, जो पीढ़ी दर पीढ़ी बीमारी से ग्रसित होती रहेगी। एमएलएन मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. वत्सला मिश्रा ने बताया कि थैलेसीमिया से बचाव जागरूकता से ही संभव है। यह भी पढ़ें- विश्व थैलेसीमिया दिवस पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजनशादी से पहले जांच का महत्व साथ ही शादी से पहले एचबी इलेक्ट्रोफोरिसिस या एचपीसीएल जांच कराकर आने वाली पीढ़ी को इस बीमारी...