नई दिल्ली, जनवरी 22 -- राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्तियों को थाने के बाहर बैठाकर उनके फोटो खींचने, उन्हें मीडिया व सोशल मीडिया में प्रसारित करने और कथित रूप से अपमानजनक परिस्थितियों में प्रस्तुत करने की प्रथा पर कड़ा रुख अपनाया है। इस गंभीर मुद्दे पर न्यायालय ने स्वप्रेरणा से संज्ञान लेते हुए इसे न केवल असंवैधानिक बताया, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और गरिमा के अधिकार का सीधा उल्लंघन करार दिया है। जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी को दोष सिद्ध होने से पहले अपराधी की तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कानून के शासन और संवैधानिक नैतिकता के विरुद्ध है। अंतरिम आदेश में कोर्ट ने पुलिस द्वारा अपलोड की गई गिरफ्तार व्यक्तियों की सभी तस्वीरें और संबंधित सामग्री को सोशल मीड...
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