सुपौल, नवम्बर 28 -- बलुआ बाजार , एक संवाददाता बसंतपुर प्रखंड क्षेत्र के संस्कृत निर्मली पंचायत के परवाहा वार्ड सात में आयोजित सुपौल जिला संतमत सत्संग के दूसरे दिन भागलपुर से आये संतों ने स्तुति-विनती के माध्यम से दूसरी पाली की शुरुआत की। मौके पर महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज के शिष्य वेदानांद जी महाराज ने कहा कि भक्ति दो प्रकार की होती है। सगुण और निर्गुण। मनुष्य को सर्वेश्वर की अचल भक्ति करनी चाहिए। जीवात्मा प्रभु का अभिन्न अंश है, इसलिए मनुष्य को नित्य दिन सर्वेश्वर की भक्ति ओर ध्यान करनी चाहिए। कहा कि मनुष्य को चोरी , झूठ , नशा , व्यभिचार ओर हिंशा इन पंच महापापो से दूर रहनी चाहिए। मंच के माध्यम से यह घोषणा की गई कि वर्ष 2026 में सुपौल जिला संतमत सत्संग का 34वां वार्षिक अधिवेशन त्रिवेणीगंज प्रखंड के गोन्हा गजहर में आयोजित होगी।
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