सीवान, अप्रैल 25 -- मैरवा, एक संवाददाता। परसिया बुजुर्ग गांव में चल रहे रामकथा के दौरान प्रकाश जी महाराज ने कथा कि शुरुआत श्री राम चंद्र कृपालु भजमन के सामूहिक गान से किया। कहा कि रामकथा केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है। यह हमारे भीतर के अहंकार (रावण) पर विवेक (राम) की विजय का उत्सव है। जब रावण जैसा महाविद्वान अहंकारी हो जाता है, तो उसका पतन निश्चित है। विभीषण के प्रसंग पर वे जोर देते हुए कहते हैं कि शरणागति ही प्रभु को पाने का सबसे सरल मार्ग है। प्रभु राम ने शत्रु के भाई को भी गले लगाया, क्योंकि उन्होंने विभीषण के हृदय की भक्ति को देखा, उसके कुल को नहीं।भगवान राम ने विभीषण को केवल इसलिए स्वीकार नहीं किया कि उसने रावण का साथ छोड़ा, बल्कि इसलिए कि उसने प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण किया। भगवान शस्त्रों से नहीं, बल्कि भक्त के भाव से जीतते है...