नई दिल्ली, अप्रैल 29 -- नरेंद्र तनेजा,पेट्रोलियम विशेषज्ञ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का 'ओपेक' और 'ओपेक प्लस' से आगामी 1 मई से अलग होना पूरी दुनिया, विशेषकर तेल-आयातक राष्ट्रों के लिए एक सुखद घटना है। ओपेक एक ऐसा 'कार्टेल' (समूह) है, जिसके सदस्य देश तेल का उत्पादन करते हैं और अधिकता होने के कारण इसका बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं। यह संगठन इसीलिए बनाया गया, ताकि तेल की वैश्विक कीमतों पर वे मिलकर नियंत्रण रख सकें। इसके लिए वे अपना उत्पादन घटाने से भी नहीं हिचकते, ताकि उनका लाभ बना रहे। यूएई इस संगठन का महत्वपूर्ण सदस्य देश है। उसके बाहर निकलने से ओपेक कमजोर होगा और तेल की कीमतों पर उसका शिकंजा ढीला पड़ सकता है। यह घटनाक्रम बताता है कि अमीरात ने तेल को लेकर भविष्य की अपनी रणनीतियों को आकार देना शुरू कर दिया है। गौरतलब है, बीते दिनों उसने त...