तेरह साल बाद शनि जयंती व शनि अमावस्या का बन रहा दुर्लभ संयोग
गंगापार, मई 14 -- ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को शनि जयंती का महापर्व मनाया जाता है। नवग्रहों में शनिदेव का विशिष्ट स्थान है। शनिदेव को न्याय के देवता कर्मफल के दाता कहा जाता है। पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष 16 मई शनिवार को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या शनि जयंती का महासंयोग बन रहा है। शनिवार के दिन शनि जयंती का योग 13 वर्ष पूर्व 2013 में बना था। खास बात यह है कि इस दिन शनिश्चरी अमावस्या, वट सावित्री व्रत, केदार योग, सौभाग्य योग,शोभन योग और 30 साल बाद बनने वाला शश महापुरुष राजयोग एक साथ बन रहे हैं। पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होकर 17 मई को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 16 मई को ही शनि जयंती का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष विशेषज्ञ पं उमेश शास्त्री दैवज्ञ के अनुसार इतने शुभ...
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