तृष्णाओं पर अंकुश ही सच्चा तप : श्री ज्ञेयसागर
रांची, सितम्बर 22 -- रांची, संवाददाता। राजधानी के दिगंबर जैन मंदिर में मनाए जा रहे दशलक्षण महापर्व पर सोमवार को भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। आचार्य श्री ज्ञेयसागर व मुनि श्री नियोग सागर के सानिध्य में उत्तम तप धर्म पर्व श्रद्धा से मनाया गया। धर्मसभा में आचार्य ने कहा कि जैन दर्शन में इच्छा निरोधस्तपः कहा गया है। इच्छाओं और तृष्णाओं पर अंकुश ही सच्चा तप है। केवल काय-क्लेश नहीं, अंतरंग वृत्तियों की शुद्धि जरूरी है। जैसे अग्नि में तपकर सोना कुंदन बनता है, वैसे ही तप से आत्मा के कर्म-मल नष्ट होते हैं। मुनि श्री नियोग सागर ने 12 प्रकार के तपों की व्याख्या करते हुए कहा कि तप अहंकार मुक्त और कषायों को शांत करने वाला होना चाहिए। यह भी पढ़ें- Varanasi News: इच्छाओं को रोकना ही तप : जैन मुनि इस अवसर पर अपर बाजार और वासुपूज्य जिनालय में विशेष पूजन व ...
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