पूर्णिया, मार्च 11 -- बैसा, एक संवाददाता। पवित्र रमजान महीने का तीसरा अशरा 10 मार्च की रात से शुरू हो रहा है। इस अशरे में रोजेदार अपने गुनाहों की माफी के लिए विशेष रूप से इबादत करते हैं। जमीयत ए उलेमा हिन्द बैसा के सदर हाजी नाहिद गनी ने बताया कि रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का और तीसरा अशरा निजात का होता है। तीसरे अशरे में इबादत करने वालों को जहन्नुम की आग से निजात मिलने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि 20वें रोजे की मगरिब से तीसरा अशरा शुरू होता है। इसी अशरे में एतकाफ भी किया जाता है। रमजान के अंतिम दस दिनों में मस्जिद में रहकर अल्लाह की इबादत करने को एतकाफ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पूरे दस दिनों तक एतकाफ करता है, उसे दो हज और दो उमरा के बराबर सवाब मिलता है। हा...