इटावा औरैया, जून 13 -- पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी से प्राप्त रकम को आरोपी अलग-अलग खातों के माध्यम से निकालकर आपस में बांट लेते थे। पुलिस की नजर से बचने के लिए वे लगातार मोबाइल नंबर और सिम कार्ड बदलते रहते थे। गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेजों के जरिए या अन्य माध्यमों से बड़ी संख्या में सिम कार्ड हासिल करते थे और उनका उपयोग कुछ समय तक करने के बाद बदल देते थे। गिरोह का मुख्य सरगना नीरज सिंह है, जो केवल कक्षा तीन तक पढ़ा है। तमिलनाडू में मजदूरी कर चुका है। पूछताछ में नीरज ने बताया कि उसने कानपुर नगर में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से साइबर ठगी के तरीके सीखे थे। इसके बाद उसने स्थानीय युवकों को अपने साथ जोड़कर एक संगठित गिरोह तैयार किया और ठगी का नेटवर्क खड़ा कर लिया। पिछले छह महीनों से यह गिरोह सक्रिय था और लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहा था...