नई दिल्ली, जनवरी 6 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि यदि कोई शख्स गलत इरादे से किसी नाबालिग बच्चे को अपने प्राइवेट पार्ट को छूने के लिए मजबूर करता है, तो यह 'पॉक्सो एक्ट' (POCSO Act) के तहत गंभीर यौन हमला माना जाएगा। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह फैसला एक शख्स की सजा को बरकरार रखते हुए सुनाया, जिस पर तीन साल की बच्ची के साथ यौन शोषण करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि छोटे बच्चे के साथ ऐसी हरकत करना पॉक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत एक गंभीर अपराध है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला साल 2022 का है, जब एक तीन साल की बच्ची ने अपनी मां को बताया कि उनके घर में रहने वाले एक किराएदार ने उसे अपने निजी अंग दिखाए और उसे छूने पर मजबूर किया। इसके बाद मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। निचली अदालत ने पहले ही आरोपी...