बांदा, अप्रैल 21 -- बांदा। जनपद की धरती को हरा-भरा करने के लिए शासन हर साल पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित करती है और करोड़ों रुपये पौधरोपण से लेकर देखरेख के नाम पर खर्च करती है। इसके बावजूद जिले का वन क्षेत्र एक फीसदी भी नहीं बढ़ा। अगस्त में मंत्री व विधायक पौधरोपण करते फोटो खिंचवाते हैं। इसके बाद सुध नहीं लेते। उनके जाते ही पौधे जानवरों का निवाला बन जाते हैं। तीन वर्ष में दो करोड़ पौधे रोपित किए गए, पर इनमें अधिकांश गायब हैं। वन विभाग की मानें तो 33 फीसदी वन क्षेत्र होना चाहिए। जबकि दशक भर से यहां का हरियाली का दायरा महज 3.0 प्रतिशत ही है। यह भी पढ़ें- सड़क चौड़ीकरण व हाईवे बनाने में लाखों पेड़ गायब जबकि हर साल वन व अन्य विभाग मिलकर लाखों पौधे रोपित करते हैं। इसके बाद भी हरियाली नहीं आ रही है। जबकि पौधरोपण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा...
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