हाथरस, मार्च 1 -- हाथरस। तीज त्यौहार हिन्दू धर्म संस्कृति की जान है। इसलिए होलिका दहन का भी विशेष महत्व है। इसकी तैयारियों में भक्त और संस्थाएं जुट गई हैं। 24 फरवरी से होलाष्टक की शुरुआत हुई। इस दौरान शुभ कार्यो पर ब्रेक रहेगा। इसलिए अब होली के बाद ही शुभ कार्य हो सकेंगे। विद्वानों के अनुसार होलिका दहन भद्रा के पुछ में पांच बजकर 20 मिनट पर शुभ रहेगा। विद्वानों की मानें तो होलाष्टक लगने के बाद शुभ कार्य नहीं होते हैं। इसलिए भजन और भक्ति को ही महत्व दिया गया है। होलिका दहन की रात्रि को जागरण का महत्व है। इसे दारुण रात्रि की संज्ञा दी गई है। आचार्य पंकज शास्त्री ने बताया कि पूर्णिमा तिथि दो मार्च को तीन बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी। इस दौरान भद्रा लग रही हैं। उन्होंने बताया कि भद्रा के दौरान होलिका दहन नहीं हो सकता है। उन्हेांने बताया कि होलिका...
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