वाराणसी, मार्च 30 -- वाराणसी। काशी संगीत कला महोत्सव की अंतिम निशा के उत्तरार्द्ध में सितार की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। पद्मश्री पं.शिवनाथ मिश्र, उनके पुत्र देवव्रत मिश्र एवं पौत्र कृष्णा मिश्र ने प्रभावपूर्ण सितारवादन से श्रोताओं को आनंदित किया। गायन, वादन और नृत्य का क्रम सूर्योदय तक अबाध रूप से चला। सितार वादन में मिश्र त्रयी ने राग परमेश्वरी में अलाप के पश्चात रूपक ताल में पंचम सवारी की धुन सुनाई। इसके बाद राग भैरवी में दादरा की अत्यंत मनमोहक धुन सुनाकर महोत्सव की पूर्णाहुति की। तबला पर संगत प्रशांत मिश्र ने की। इसके पूर्व पं.माता प्रसाद मिश्र, पं.रविशंकर मिश्र एवं डॉ.ममता टंडन के कथक नृत्य किया। उन्होंने गणेश वंदना से प्रारंभ करने के बाद विलंबित तीन ताल में पारंपरिक नृत्य किया। नृत्य के दौरान गायन में पं.संतोष कुमार मिश्र ने सहयोग किया...
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