नई दिल्ली, अक्टूबर 26 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बेंगलुरु के नेलाकादिरनाहल्ली गांव में तीन दशक से भी पहले शुरू की गई भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने पाया कि इसमें धोखाधड़ी हुई थी, प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं थीं और एक सहकारी समिति के लिए शुरू की गई इस योजना के लिए कोई विधिवत स्वीकृत हाउसिंग योजना भी नहीं थी। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अपने फैसले में अपील स्वीकार कर ली, हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को पलट दिया और एकल जज द्वारा दिए गए आदेश को बहाल कर दिया। फैसला लिखते हुए, जस्टिस चंद्रन ने एक मामले में पेंसिल्वेनिया सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का जिक्र किया और कहा कि किसी भी सरकारी प्राधिकरण के पास असीमित शक्तियां नहीं होतीं और उनके फैसलों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। यह...