मेरठ, मार्च 11 -- मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित खाद्य एवं औषधि प्रशासन भवन में माइक्रोबायोलॉजी लैब फरवरी 2024 में शुरु की गई थी। तीन करोड़ से तैयार इस लैब में खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया फंगस की जांच की जानी थी। दो साल में लैब में मात्र 45 सैंपल की जांच ही हो पाई है। लैब में स्टाफ समेत पर्याप्त मात्रा में जांच के लिए केमिकल उपलब्ध है। इसके बाद भी जांच नहीं हो पा रही है। शहर में दूषित पानी और खाद्य पदार्थों की वजह से फूड पॉइजनिंग के केस लगातार सामने आ रहे हैं। इसके बाद भी लैब संचालित करने वाले अधिकारी और एफएसडीए विभाग का इस ओर ध्यान नहीं है। तीन करोड़ से तैयार इस लैब में दूध, दही, पनीर, फल-सब्ज़ियों समेत खाद्य पदार्थों में हानिकारक बैक्टीरिया-फंगस और उसकी क्षमता का पता लगाया जाना था। खाद्य पदाथों में हानिकारक बैक्टीरिया जैसे ई कोलाई, सालमोनेल...
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