नवादा, अप्रैल 16 -- नवादा जिले में कभी सरसों, राई, तीसी, तिल व सूरजमुखी जैसी लहलहाती फसलें किसानों की खुशहाली का प्रतीक हुआ करती थीं, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति इसके उलट है। बढ़ती लागत, जलवायु परिवर्तन की मार और बाजार में साहुकारों व बिचौलियों के जाल ने नवादा के तिलहन उत्पादकों को निराशा के गर्त में धकेल दिया है। इस वर्ष जिले के विभिन्न प्रखंडों में तिलहन की खेती करने वाले किसान बहुत संतुष्ट दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालत यह है कि इस साल तिलहन खेती की कुल लागत 38 प्रतिशत तक बढ़ गई, लेकिन मुनाफा 25 प्रतिशत तक घट गया। नवादा में तिलहन की खेती अब उस हाल तक पहुंच गई है कि यदि लागत पर नियंत्रण और बाजार की सीधी पहुंच सुनिश्चित नहीं की गई, तो वह दिन दूर नहीं जब जिले के खेतों से पीला सोना पूरी तरह गायब हो जाएगा। यह भी पढ़ें- आंधी और बारिश से तेलहन...