वाराणसी, सितम्बर 27 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। विवाद की उत्पत्ति तामसिक गुण के कारण होती है। तामसिक गुण के दुष्प्रभाव से ही व्यक्ति सत्व को समझ ही नहीं पाता। ये बातें प्रो.शशिकांत द्विवेदी ने कहीं। वह बीएचयू के मालवीय भवन में रविवासरीय गीता प्रवचन कर रहे थे। प्रो.द्विवेदी ने कहा कि सत-असत का विवेक ही ज्ञान का कारण है। गीता का द्वितीय अध्याय हमें आत्म तत्व के स्वरूप का ज्ञान कराता है। शरीर के अंदर जो आत्मा है उसको समझना, तद्ववत् आचरण करना ही आध्यात्म हैं। गीता में जीवन की सत्यता के व्यावहारिक पक्षों को प्रस्तुत किया गया है। गीता मोह को नष्ट कर देने में सक्षम है। जीव का आत्म तत्व सर्वदा नवीन रहता है, वह विकार रहित है।कार्यक्रम का प्रारंभ महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। अभिषेक कुशवाहा, धर्मेंद्र गुप्ता सौरभ एवं ममता त्रिपाठी ने भजन...