ताकि सबकी थाली में आए शुद्ध भोजन
नई दिल्ली, मई 31 -- राजीव शुक्ला, संसद सदस्य भारत में लोग अक्सर चीन का मजाक उड़ाते हैं। सोशल मीडिया पर तैरते वीडियो में बताया जाता है कि वहां लोग चमगादड़ खाते हैं, सांप और कीड़े खाते हैं, जबकि हम अपने खाने को शुद्ध बताने की कोशिश करते हैं। हालांकि, शायद ही हमने कभी सोचा है कि हमारी अपनी थाली में क्या बचा है? हम जिस दूध को हर सुबह बच्चों को पिला रहे हैं, वह कितना असली है और जिस पनीर को प्रोटीन समझकर खा रहे हैं, उसमें कितना दूध है और कितना केमिकल? जिस घी को हम परंपरा कहते हैं, उसमें कितना जानवर का फैट और कितना सिंथेटिक तेल मिल चुका है। सवाल यह नहीं कि कौन क्या खा रहा है, बल्कि प्रश्न यह है कि क्या हम सच में शुद्ध खाना खा रहे हैं? भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक और उपभोक्ता देश है। साल 2023-24 में देश में लगभग 23.1 करोड़ टन दूध का उत्पा...
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