नई दिल्ली, जुलाई 30 -- सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में अपराध के दोषियों को बची हुई पूरी जिंदगी (ताउम्र) जेल की सजा को सही ठहराया। शीर्ष अदालत ने कहा कि बिना छूट के मरते दम तक जेल में बिताने की सजा पूरी तरह से कानूनी और संवैधानिक रूप से सही है। जस्टिस संजय करोल और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने उन याचिकाओं को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है, जिसमें अपराध के दोषी को बची हुई जिंदगी जेल में बिताने की सजा को असंवैधानिक, गैर-कानूनी और सजा में मिलने वाली छूट के कानूनी नियमों के खिलाफ बताया गया था। पीठ मंगलवार को पारित 21 पन्नों के फैसले में कहा कि चूंकि भारत संघ बनाम वी. श्रीहरन के मामले में संविधान पीठ के फैसले से पहले ही यह मुद्दा पूरी तरह से तय हो चुका है। यह भी पढ़ें- दोषी को बची हुई जिंदगी जेल में बिताने की सजा संवैधानिक प्रावधानों का ह...