तलाक का आधार भले ही परित्याग, फिर भी पत्नी भरण-पोषण की हकदार; हाईकोर्ट का फैसला
लखनऊ, सितम्बर 23 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने वैवाहिक विवाद मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कहा है कि भले ही पति ने पत्नी के परित्याग के आधार पर तलाक की डिक्री प्राप्त किया हो लेकिन इससे महिला का भरण-पोषण का दावा स्वतः समाप्त नहीं हो जाता है। वह पूर्व पति से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आवश्यक है कि उक्त तलाकशुदा महिला ने दोबारा शादी नहीं की है और अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है। न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की एकल पीठ ने सुलतानपुर के परिवार न्यायालय के आदेश के विरुद्ध पत्नी द्वारा दाखिल पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है। परिवार न्यायालय ने महिला के भरण-पोषण के दावे को खारिज कर दिया था। महिला ने वर्ष 2009 में धारा 125 सीआरपीसी के तहत भरण-पोषण का मुकदमा दाखिल क...
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