आगरा, मार्च 15 -- इंडियन अकादमी आफ पीडियाट्रिक्स के डाक्टरों का कहना है कि तर्कहीन दवाइयों से प्रतिरोध बढ़ता है। इससे दवाइयां भविष्य में काम नहीं करती हैं। विशेषकर एंटीबायोटिक्स के साथ ऐसा हो रहा है, इसलिए डाक्टरों को एक भी व्यर्थ या तर्कहीन दवाई नहीं देनी चाहिए। रविवार को आईएपी की संक्रामक रोगों पर कार्यशाला में अध्यक्ष डा. संजीव अग्रवाल ने कहा कि प्रतिरोध को कम करने के लिए साक्ष्य आधारित प्रबंधन की जरूरत है। यानि अच्छी तरह जांच के बाद ही दवाइयां लिखनी चाहिए। कार्यशाला में वाराणसी के डा. अशोक राय, नोएडा के डा. विवेक गोस्वामी, डा. राकेश भाटिया, डा. सुनील अग्रवाल, यूपी आईएपी के अध्यक्ष डा. आरएन द्विवेदी, डा. आरएन शर्मा, डा. राहुल पेंगोरिया, डा. स्वाति द्विवेदी ने भी जानकारी दी।
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