नई दिल्ली, जुलाई 18 -- 'तहलका' के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल के वकील ने शनिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी आखिरी दलीलें पूरी कीं। यह मामला 2013 के यौन उत्पीड़न केस में तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील से जुड़ा है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता का बयान भरोसेमंद नहीं था और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा जाना चाहिए। न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की पीठ के समक्ष तेजपाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने कई तर्क दिए। उन्होंने कहा कि घटना से पहले और बाद में शिकायतकर्ता का व्यवहार, साथ ही उस समय के ईमेल, व्हाट्सएप मैसेज और दस्तावेजी रिकॉर्ड, अभियोजन पक्ष के मामले के उलट थे। पोंडा ने अदालत में एक माफी वाले ईमेल का ज़िक्र किया। पोंडा ने कहा कि शिकायतकर्ता ने शुरू में आपराधिक शिका...