तय समय में इंसाफ नहीं कर पा रहीं फास्ट-ट्रैक अदालतें? 1 साल में फैसले का था नियम
नई दिल्ली, जुलाई 25 -- दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच नीट पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने की घोषणा की है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर फास्ट-ट्रैक अदालतें कितना फास्ट यानी तेजी से काम करती हैं और उनका पिछला रिकॉर्ड कैसा है। देश भर में रेप और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए बनाए गए फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSCs) खुद सुस्ती का शिकार हो रहे हैं। इन विशेष अदालतों का मुख्य उद्देश्य अपराध का संज्ञान लेने के एक साल के भीतर ट्रायल पूरा करना था, लेकिन ताजा आंकड़ों के मुताबिक मामलों के निपटारे की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी है।उम्मीद से बहुत कम है मामलों के निपटारे की रफ्तार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में रेप और पॉक्सो के 1.4 लाख से ज्यादा...
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