नई दिल्ली, मई 4 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पिछले कुछ समय से केंद्र और राज्यों में स्थिर सरकारों का दौर रहा है। पहले की तुलना में जनता का जनादेश स्पष्ट दिखा है लेकिन इसके बावजूद जब-जब स्थापित राजनीतिक दल जनता की आकांक्षाओं पर खरे नहीं उतरे तो लोगों ने वैकल्पिक राजनीति को तरजीह दी। ऐसे दलों पर भरोसा जताया जो राजनीति में एकदम नए थे। तमिलनाडु में इस बार यही हुआ है। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे टीवीके पर लोगों ने भरोसा जताया है। पिछले चुनाव में तमिलनाडु की जनता ने वंशवाद को नजरअंदाज करते हुए डीएमके पर भरोसा जताया था लेकिन डीएमके शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार और चुनावी वादे पूरे नहीं होने से स्टालिन सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ने लगी। दूसरी तरफ जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक पर उत्पन्न नेतृत्व संकट दूर नहीं हुआ और चुनाव से ठीक पहले अन्नाद्...