नई दिल्ली, अप्रैल 27 -- एस श्रीनिवासन,वरिष्ठ पत्रकार तमिलनाडु में नई विधानसभा के लिए मत पड़ चुके हैं, अब नतीजों का इंतजार है। बहरहाल, इस बार दो तरह के रुझान देखने को मिले। पहला, चुनाव आयोग 'वोटों की खरीद रोकने में नाकाम' रहा और दूसरा, चुनाव प्रचार को खास तौर से इंस्टाग्राम की तर्ज पर तैयार किया गया था, जो जेन-जी का पसंदीदा सोशल मीडिया मंच है। यह शायद तमिलनाडु के इतिहास का सबसे 'भ्रष्ट' चुनाव था, क्योंकि मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसों का लेन-देन बड़े पैमाने पर हुआ। हैरानी की बात यह है कि माकपा ने भी, जो हमेशा से इन सब चीजों से दूर रही, इस बार पैसे बांटे। सुरक्षा बलों की खास टुकड़ियां चेन्नई और दूसरे शहरों की सड़कों पर तैनात थीं। वे गाड़ियों को रोक-रोककर पैसे की तलाशी ले रही थीं। इससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। आयोग ने राजनीतिक पार्टि...