गंगापार, सितम्बर 1 -- मांडा, हिन्दुस्तान संवाद। कई दिनों से लगातार बढ़ रहे जलस्तर से मांडा क्षेत्र के गंगा तट पर बसे डेंगुरपुर, महेवा कला, बादपुर, बामपुर, उमापुर, नरवर चौकठा, जेरा आदि तमाम गांवों की जोती बोई सब्जियों परवल, करैला, भिंडी आदि के साथ खरीफ की फसलें भी गंगा के बाढ़ में समाहित हो चुकी हैं।पिछले साल भी गंगा में कुछ दिनों के अंतराल पर दो बार आई बाढ़ में इन गांवों के किसानों की पूरी खेती गंगा के बाढ़ में समाहित होकर विनष्ट हो गई थी। इन गांवों के तमाम पीड़ित किसानों का कहना है कि हर साल गंगा के बाढ़ में उनकी जोती बोई खेती पानी में डूबकर नष्ट हो जाती है। उसके बाद प्रशासनिक सर्वे कर स्थानीय राजस्व कर्मी क्षति हुई फसल का आकलन भी करते हैं, लेकिन कभी भी किसानों को फसल क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिलती।

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