तप का अर्थ इंद्रियों पर संयम स्थापित कर मन को विकारों से मुक्त करना: मुनि श्री
गिरडीह, सितम्बर 23 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। न धर्मावलंबियों के आस्था का केंद्र श्री सम्मेदशिखर जी मधुबन में दशलक्षण पर्व के सातवें दिन मंगलवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ उत्तम तप धर्म का पालन किया गया। इस अवसर पर मधुबन के विभिन्न जिनालयों एवं धार्मिक संस्थानों में पूजा, विधान, अभिषेक और शांतिधारा सहित विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। साधु-संतों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने धार्मिक क्रियाओं में शामिल होकर आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण के मार्ग पर बढ़ रहे हैं। दशलक्षण पर्व के सातवें दिन आयोजित प्रवचन सभा में साधु संतों ने उत्तम तप धर्म की महत्ता बताई। कहा कि तप का अर्थ केवल उपवास करना नहीं है। यह भी पढ़ें- Lalitpur News: उत्तम तप: इच्छाओं को वश में रखने से होती आत्म शुद्धि तप का वास्तविक उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि इंद्रिय...
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