भदोही, मई 20 -- ज्ञानपुर, संवाददाता। तकनीकी विधि से अरहर की खेती कर किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। मानसून दस्तक देने के बाद किसान खेती-बाड़ी में जुट जाएंगे। अरहर की खेती कम लागत में बेहतर लाभ देती है। साथ ही टिकाऊ खेती से मिट्टी की उर्वरता शक्ति भी बढ़ती है। दाल प्रोटीन का प्रमुख स्रोत होती है। सोयाबीन को छोड़कर अरहर दाल में 20 से 26 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है। अरहर की बुवाई पंक्तियों में करना लाभकारी होता है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरपी चौधरी ने बताया कि अरहर की अगेती प्रजातियों में पारस, पारस 120 और पूसा 992 शामिल हैं, जो 120 से 150 दिन में तैयार हो जाती हैं। इनकी उत्पादन क्षमता 15 से 20 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है। वहीं देर से पकने वाली प्रजातियों में बहार, अमर, आजाद, नरेंद्र अरहर और मालवीय विकास शामिल ...