प्रयागराज, अप्रैल 22 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सार्वजनिक धन के गबन से जुड़े मामलों में जांच को किसी भी तकनीकी आधार पर रोका नहीं जा सकता है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने सिद्धार्थनगर के मनरेगा घोटाले से जुड़ी एक रिट याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी सार्वजनिक प्राधिकरण ने वित्तीय अनियमितता या आपराधिक विश्वासघात पाया है, तो उसकी गहन जांच कानूनी रूप से आवश्यक है।यह मामला सिद्धार्थनगर के मनरेगा लोकपाल द्वारा की गई एक जांच से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ताओं पर 7,91,328 रुपये के आपराधिक गबन का आरोप लगाया गया था। लोकपाल की इसी रिपोर्ट के आधार पर याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में यह ...