ढोल की आवाज पर होता है माह-ए-रमजान में इफ्तार
सहारनपुर, फरवरी 23 -- देवबंद। माह-ए-रमजान में सहरी में उठाने के लिए मोहल्ले-मोहल्ले जहां ढ़ोल बजाया जाता है वहीं दशकों से साईकिल और रिक्शा पर दीनी नात-ए-पाक चलाकर मुस्लिम बहुल मोहल्लों में ऐलान कर उठाया जाता है। इतना ही नहीं इफ्तार और सहरी के लिए भी दारुल उलूम और मरकजी जामा मस्जिद समेत दूसरें मदरसों और मस्जिदों से घंटा एवं सायरन बजाकर रोजा खोलने और सहरी का वक्त पूरा होने की जानकारी दशकों से दी जाती है। माह-ए-रमजान का रोजा इस्लाम मजहब के मानने वाले सभी बालिगों (व्यस्कों) और स्वस्थ मर्द हो या औरत पर रखना फर्ज है। सदियों से देवबंद में सहरी और इफ्तार में घंटा बजाकर रोजा खोलने और सहरी का समय पूरा होने को सूचित किया जाता है। वहीं सहरी से एक घंटे पहले तक नगर के मुस्लिम बहुल मोहल्लो में यह आवाजे सुनाई देती है कि 'सहरी का वक्त हो गया है उठ जाओं, कह...
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