गया, मई 8 -- गया जी में बौद्ध पर्यटन को नई पहचान देने के उद्देश्य से तैयार किया गया ऐतिहासिक ज्ञान पथ आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अधूरा है। ढुंगेश्वरी पहाड़ी से बोधगया तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क तो बना दी गई। लेकिन, सड़क किनारे लाइटिंग, पौधारोपण, पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं अब तक जमीन पर नहीं उतर सकीं। यही वह ऐतिहासिक मार्ग है जहां भगवान बुद्ध बनने से पूर्व सिद्धार्थ गौतम ने ढुंगेश्वरी पहाड़ी पर छह वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। इसके बाद वे इसी मार्ग से पैदल चलकर सुजाता गढ़ पहुंचे थे, जहां उन्हें मध्यम मार्ग का ज्ञान प्राप्त हुआ। इस ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे ज्ञान पथ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी。

पर्यटकों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं पर्यटन विभाग द्वारा हृदय योजना के त...