हल्द्वानी, अगस्त 3 -- हल्द्वानी। ड्रोन के जरिए 'सीड बम' छिड़काव और साल के बीजों से रोजगार सृजन का सपना दिखाने वाली वन विभाग की दो महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रशासनिक अदूरदर्शिता और इच्छाशक्ति की कमी की भेंट चढ़ गई हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड की तर्ज पर वन विभाग ने वर्ष 2023 में साल के बीजों का व्यावसायिक उपयोग करने की योजना बनाई थी। उत्तराखंड के करीब 5 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले साल के वनों से ग्रामीणों के माध्यम से सैकड़ों क्विंटल बीज एकत्र किए गए थे। मंशा यह थी कि स्थानीय लोगों की मदद से इन बीजों से तेल (मक्खन का विकल्प) और विभिन्न औषधियां तैयार की जाएं। इन औषधियों का उपयोग पित्त, त्वचा रोग, पेट संबंधी विकार, अल्सर, घाव और कमजोरी के इलाज में किया जाना था, जिससे स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलता। हालांकि, लचर कार्ययोजना और विभाग की ...