कोडरमा, अगस्त 9 -- डोमचांच। देश की आजादी की लड़ाई में अनगिनत वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। किसी ने जेल की यातनाएं सहीं तो किसी ने अंग्रेजी हुकूमत की गोलियां अपने सीने पर खाईं। इन्हीं गुमनाम और स्थानीय क्रांतिवीरों की शहादत की कहानी डोमचांच की धरती भी अपने सीने में समेटे हुए है। डोमचांच के लिए नौ अगस्त 1942 का दिन इतिहास के पन्नों में हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। इसी दिन भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए डोमचांच के चार वीर सपूत नूनमन धोबी, चुरामन मोदी, मंगर साव और उदित नारायण मेहता शहीद हुए थे। इन चारों वीरों की शहादत की याद में आज भी डोमचांच के शहीद चौक स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि दी जाती है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर यहां सबसे पहले झंडोत्तोलन कर शहीदों को नमन करने की परंपरा रही...